G20, या ग्रुप ऑफ ट्वेंटी, विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता, विकास और सहयोग पर चर्चा करता है। इसमें 19 देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं। यह समूह वैश्विक GDP का लगभग 85% और व्यापार का 75% प्रतिनिधित्व करता है। 2025 में G20 की अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका के पास है, और यह पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित हो रहा है। जोहान्सबर्ग में 21-23 नवंबर 2025 को आयोजित इस शिखर सम्मेलन का विषय “सॉलिडैरिटी, इक्वेलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी” (एकजुटता, समानता और स्थिरता) है। यह सम्मेलन वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, स्वास्थ्य संकट और विकास असमानता पर केंद्रित रहा।
2025 G20 शिखर सम्मेलन का अवलोकन
यह शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में 21 नवंबर को शुरू हुआ और 23 नवंबर को समाप्त हो गया। यह अफ्रीका के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि पहली बार इस महाद्वीप ने G20 की मेजबानी की। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने उद्घाटन सत्र में वैश्विक विकास मॉडल को पुनर्विचार करने की अपील की। सम्मेलन में G20 नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा-पत्र को अपनाया, जो जलवायु महत्वाकांक्षा, ऋण राहत और विकास न्याय पर केंद्रित था। इसमें बहुपक्षीयता, आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर मजबूत राजनीतिक संदेश दिया गया। अमेरिका द्वारा बहिष्कार के बावजूद, यह घोषणा सर्वसम्मति से पारित हुई, जो G20 की एकजुटता को दर्शाता है।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण और खाद्य प्रणालियों पर चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विकासशील देशों को समर्थन देने और वैश्विक पीड़ा को कम करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की अपील की।
भारत की भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी के योगदान
भारत ने इस शिखर सम्मेलन में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 नवंबर को जोहान्सबर्ग पहुंचकर स्थानीय भारतीय समुदाय और तकनीकी उद्यमियों से मुलाकात की। उन्होंने G20 को नई दिशा देने के लिए छह प्रमुख प्रस्ताव रखे:
- ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी: पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए एक वैश्विक भंडार।
- G20-एफ्रिका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव: अगले 10 वर्षों में अफ्रीका में 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षकों को तैयार करने का कार्यक्रम।
- ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम: स्वास्थ्य संकट या प्राकृतिक आपदाओं के लिए त्वरित तैनाती के लिए विशेषज्ञों की टीम।
- ड्रग-टेरर नेक्सस के खिलाफ संयुक्त प्रयास: नशीले पदार्थों और आतंकवाद के गठजोड़ को वैश्विक खतरा बताते हुए G20 स्तर पर कार्रवाई।
- क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव: महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के लिए पहल।
- ओपन सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप: जलवायु निगरानी के लिए सैटेलाइट डेटा साझा करने का साझेदारी।
मोदी ने वैश्विक विकास मॉडल को पुनर्विचार करने की वकालत की और भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ दर्शन को रेखांकित किया। उन्होंने अफ्रीका को मजबूत करने पर जोर दिया, जहां शोषण की समस्या बनी हुई है।
द्विपक्षीय बैठकें और अन्य उल्लेखनीय घटनाएं
सम्मेलन के साइडलाइन्स पर मोदी ने कई विश्व नेताओं से मुलाकात की:
- ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के साथ: ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (ACITI) पार्टनरशिप की घोषणा। भारत-कनाडा व्यापार लक्ष्य 2030 तक 50 अरब डॉलर।
- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा के साथ IBSA बैठक: दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने पर फोकस। IBSA डिजिटल इनोवेशन एलायंस और जलवायु-प्रतिरोधी कृषि के लिए फंड का प्रस्ताव।
- जमैका और नीदरलैंड्स के नेताओं से: द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जieva से: वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर बातचीत।
अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद, सम्मेलन ने G20 की स्वतंत्रता दिखाई। अगला G20 शिखर सम्मेलन 2026 में अमेरिका के मियामी में होगा।
निष्कर्ष
2025 का G20 शिखर सम्मेलन वैश्विक एकजुटता का प्रतीक साबित हुआ, जहां अफ्रीकी प्राथमिकताओं को प्रमुखता दी गई। भारत की सक्रिय भागीदारी ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत किया। यह सम्मेलन न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में नई पहलें भी लाएगा। भविष्य में G20 को और अधिक समावेशी बनाना आवश्यक है, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान हो सके। यह घटना साबित करती है कि सहयोग ही प्रगति का आधार है।

